ज्योतिष के नाम पर ठगी का सच
आज के समय में ज्योतिष के नाम पर बढ़ते फ्रॉड, अंधविश्वास और डर के कारोबार को समझिए। जानिए कैसे नकली ज्योतिषी लोगों की भावनाओं, कमजोरियों और भविष्य की चिंता का फायदा उठाकर ठगी करते हैं, और ऐसे धोखे से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है
PSYCHOLOGY
2/23/20261 मिनट पढ़ें


आज के दौर में ज्योतिष के नाम पर जो व्यापार चल रहा है, वह केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की मानसिक स्थिति, उनके डर, उनकी असुरक्षाओं और उनकी कमजोरियों का सुनियोजित दोहन बन चुका है। जब इंसान जीवन में असफलताओं का सामना करता है, जब रिश्ते टूटते हैं, जब आर्थिक संकट आता है या जब बीमारी और अनिश्चितता घेर लेती है, तब उसका मन स्वाभाविक रूप से सहारे की तलाश करता है। वह यह जानना चाहता है कि आगे क्या होगा, कब सब ठीक होगा और क्या उसकी परेशानियों का कोई अंत है। इसी मानसिक अवस्था में वह किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुँचता है जो खुद को भविष्य का ज्ञाता बताता है। यहीं से शुरू होता है वह खेल, जिसे हम ज्योतिषी फ्रॉड कहते हैं।
फ्रॉड ज्योतिषी का सबसे बड़ा हथियार उसका ज्ञान नहीं, बल्कि उसका मनोविज्ञान होता है। वह सामने वाले व्यक्ति की बातों को बहुत ध्यान से सुनता है। वह उसके चेहरे के भाव, उसकी आवाज़ का उतार-चढ़ाव और उसके शब्दों की कमजोरी को पढ़ता है। फिर वह कुछ ऐसे सामान्य वाक्य बोलता है जो लगभग हर व्यक्ति पर लागू हो सकते हैं। वह कहता है कि आप बहुत अच्छे दिल के हैं लेकिन लोग आपको समझ नहीं पाते। वह कहता है कि आपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है लेकिन आपको आपकी मेहनत का फल नहीं मिला। वह कहता है कि आपके आसपास कुछ लोग ऐसे हैं जो आपसे ईर्ष्या करते हैं। ये बातें सुनकर व्यक्ति को लगता है कि सामने वाला उसे गहराई से जानता है, जबकि सच यह है कि ये कथन इतने सामान्य होते हैं कि लगभग हर इंसान उनसे जुड़ाव महसूस कर सकता है। इस तकनीक को मनोविज्ञान में “कोल्ड रीडिंग” कहा जाता है, लेकिन आम व्यक्ति इसे चमत्कार समझ लेता है।
इसके बाद शुरू होता है डर का निर्माण। फ्रॉड ज्योतिषी कभी सीधे समाधान नहीं देता। वह पहले समस्या को असाधारण बनाता है। वह कहता है कि आपके ग्रह अत्यंत खराब स्थिति में हैं। वह बताता है कि शनि की साढ़े साती चल रही है, राहु-केतु की दशा भारी है या किसी ने आप पर नकारात्मक ऊर्जा भेजी है। इन शब्दों का उद्देश्य केवल एक है — व्यक्ति को यह विश्वास दिलाना कि उसकी परेशानी सामान्य नहीं बल्कि किसी अदृश्य शक्ति का परिणाम है। जब इंसान यह मान लेता है कि उसकी समस्या प्राकृतिक नहीं बल्कि अलौकिक है, तब वह तर्क करना बंद कर देता है। वह डर के प्रभाव में आ जाता है और सोचने की क्षमता कम हो जाती है।
डर पैदा करने के बाद अगला चरण होता है समाधान बेचना। फ्रॉड ज्योतिषी कहता है कि एक विशेष पूजा करनी होगी, महंगा रत्न पहनना होगा, विशेष अनुष्ठान कराना होगा या गुप्त उपाय करना होगा। इन उपायों की कीमत सामान्य नहीं होती। कभी हजारों तो कभी लाखों रुपये मांगे जाते हैं। व्यक्ति को यह समझाया जाता है कि यदि अभी यह उपाय नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है। डर के कारण वह पैसे देने के लिए तैयार हो जाता है। वह सोचता है कि अगर कुछ गलत हो गया तो उसका जिम्मेदार वही होगा जिसने उपाय नहीं किया। इस तरह डर इंसान से वह सब करवाता है जो वह सामान्य परिस्थिति में कभी नहीं करता।
ज्योतिषी फ्रॉड का दूसरा बड़ा आधार है अंधविश्वास। समाज में जब वैज्ञानिक सोच और तर्कशीलता कमजोर होती है, तब अंधविश्वास तेजी से पनपता है। कई बार पढ़े-लिखे लोग भी भावनात्मक दबाव में आकर तर्क खो देते हैं। जब जीवन में बार-बार असफलता मिलती है, तब इंसान कारण ढूंढता है। वह यह स्वीकार नहीं करना चाहता कि कभी-कभी असफलता परिस्थितियों, गलत निर्णयों या साधारण दुर्भाग्य के कारण भी हो सकती है। उसे एक ऐसा कारण चाहिए जो स्पष्ट और बाहरी हो। ग्रह, नक्षत्र और दोष इस खाली जगह को भर देते हैं। इससे व्यक्ति को मानसिक राहत मिलती है कि समस्या उसकी नहीं बल्कि किसी ग्रह की है। लेकिन यही सोच उसे निर्भर बना देती है।
सोशल मीडिया ने इस धोखाधड़ी को और आसान बना दिया है। आज कोई भी व्यक्ति कुछ आकर्षक वीडियो बनाकर, नकली प्रशंसापत्र दिखाकर और भव्य ऑफिस का प्रदर्शन करके खुद को बड़ा ज्योतिषी साबित कर सकता है। लाइव सेशन में वह लोगों से उनकी निजी जानकारी लेता है और बाद में उसी जानकारी को भविष्यवाणी के रूप में प्रस्तुत करता है। लोग लाइक्स और फॉलोअर्स देखकर प्रभावित हो जाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भरोसे का भ्रम पैदा कर दिया है। जो जितना दिखता है, वह उतना ही सच्चा मान लिया जाता है।
ज्योतिषी फ्रॉड का एक और पहलू है बार-बार समस्या का निर्माण। जब व्यक्ति एक उपाय करा लेता है और तुरंत परिणाम नहीं मिलता, तो उसे कहा जाता है कि कोई दूसरा दोष है। फिर नया उपाय बताया जाता है। यह सिलसिला चलता रहता है। व्यक्ति धीरे-धीरे आर्थिक और मानसिक रूप से थक जाता है, लेकिन उसे यह स्वीकार करना मुश्किल लगता है कि वह ठगा गया है। वह सोचता है कि शायद उसने श्रद्धा में कमी की होगी या पूजा सही तरीके से नहीं हुई होगी। यह अपराधबोध भी फ्रॉड का हिस्सा बन जाता है।
यह समझना जरूरी है कि भविष्य कोई पत्थर पर लिखा हुआ वाक्य नहीं है। जीवन हमारे निर्णयों, हमारी मेहनत, हमारे वातावरण और अनगिनत परिस्थितियों का परिणाम है। ग्रहों की स्थिति हमारे कार्यों की जगह नहीं ले सकती। यदि कोई व्यक्ति आपको यह कहे कि वह निश्चित रूप से आपका भविष्य बदल सकता है, तो यह दावा ही संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त है। कोई भी इंसान पूर्ण निश्चितता के साथ भविष्य नहीं जान सकता।
इसका अर्थ यह नहीं कि हर ज्योतिषी गलत है। परंतु आंख मूंदकर विश्वास करना खतरनाक है। यदि कोई व्यक्ति आपको डरा कर पैसे मांगता है, यदि वह हर समस्या को अलौकिक कारण से जोड़ता है, यदि वह बार-बार महंगे उपाय सुझाता है और यदि वह आपको यह विश्वास दिलाता है कि उसके बिना आपका भविष्य अंधकारमय है, तो सावधान हो जाना चाहिए। ज्ञान कभी डर पर आधारित नहीं होता। सच्ची सलाह आपको आत्मनिर्भर बनाती है, निर्भर नहीं।
समाज को जरूरत है जागरूकता की। शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि तर्कशीलता और प्रश्न करने की क्षमता तक पहुंचनी चाहिए। जब लोग सवाल पूछना सीखेंगे, जब वे प्रमाण मांगेंगे और जब वे डर के बजाय विवेक से निर्णय लेंगे, तब ऐसे फ्रॉड का प्रभाव कम होगा। बच्चों और युवाओं को यह सिखाना जरूरी है कि समस्याओं का समाधान मेहनत, योजना और धैर्य से आता है, न कि किसी महंगे अनुष्ठान से।
अंततः, ज्योतिषी फ्रॉड केवल आर्थिक ठगी नहीं है, बल्कि यह मानसिक गुलामी का निर्माण है। यह इंसान को यह विश्वास दिलाता है कि उसकी किस्मत उसके हाथ में नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि भविष्य पूरी तरह हमारे नियंत्रण में न सही, पर हमारे प्रयासों से प्रभावित जरूर होता है। जब इंसान खुद पर भरोसा करना सीख लेता है, जब वह अपने निर्णयों की जिम्मेदारी लेने लगता है और जब वह डर के बजाय समझ को चुनता है, तब कोई भी फ्रॉड ज्योतिषी उसे नियंत्रित नहीं कर सकता। अंधविश्वास की जंजीरें तभी टूटती हैं जब मन स्वतंत्र सोचने लगता है। और शायद यही सबसे बड़ा उपाय है — खुद पर विश्वास, तर्क पर भरोसा और डर से आज़ादी।