बेमेतरा जिले में बोर खनन पर बैन के बावजूद जारी अवैध बोरवेल, बढ़ता जा रहा जल संकट
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में प्रशासन द्वारा बोरवेल खनन पर बैन के बावजूद अवैध बोर खनन जारी है। गिरते भूजल स्तर के बीच यह स्थिति आने वाले बड़े जल संकट की चेतावनी दे रही है।
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3/12/20261 मिनट पढ़ें


छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला में भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण प्रशासन पहले ही नए बोरवेल खनन पर प्रतिबंध लगा चुका है। शासन द्वारा स्पष्ट रूप से बोर खनन पर बैन लगाए जाने के बाद उम्मीद थी कि भूजल संरक्षण की दिशा में स्थिति सुधरेगी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिले के कई गांवों और खेतों में अब भी अवैध रूप से बोर खनन का काम जारी है। प्रशासन के आदेशों के बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ लोग गुप्त रूप से बोरवेल खुदवा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में जल संकट और गहरा होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
दरअसल पिछले कुछ वर्षों में जिले में खेती के लिए भूजल पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। खासकर धान जैसी अधिक पानी की मांग वाली फसलों के कारण किसानों को सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए कई किसान और जमीन मालिक नए बोरवेल करवाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब भूजल स्तर तेजी से नीचे जाने लगा तो प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नए बोर खनन पर रोक लगाने का फैसला लिया। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों को नजरअंदाज करते हुए चोरी-छिपे बोर मशीनों से जमीन की गहराई तक खुदाई करा रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों से मिल रही जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर रात के समय बोर मशीनें चलाई जाती हैं, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। कुछ मामलों में दूरदराज के खेतों में बोर खनन किया जाता है, जहां निगरानी कम होती है। यह अवैध गतिविधि धीरे-धीरे पूरे इलाके के जल संसाधनों के लिए खतरा बनती जा रही है। जब किसी क्षेत्र में अत्यधिक संख्या में बोरवेल हो जाते हैं, तो जमीन के अंदर मौजूद पानी तेजी से खत्म होने लगता है और आसपास के हैंडपंप, कुएं और छोटे जल स्रोत सूखने लगते हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों पर पड़ता है, जो पीने के पानी के लिए इन पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। कई गांवों में पहले से ही गर्मी के मौसम में पानी की कमी महसूस होने लगती है। यदि इसी तरह अवैध बोर खनन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। जल संकट केवल खेती को ही नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन की पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल एक सीमित प्राकृतिक संसाधन है और इसका उपयोग बेहद संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए। यदि जमीन के अंदर से लगातार पानी निकाला जाता रहा और उसे प्राकृतिक रूप से रिचार्ज होने का पर्याप्त समय नहीं मिला, तो एक समय ऐसा भी आ सकता है जब नए बोरवेल से भी पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में सरकारें भूजल दोहन को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करती हैं।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पहले भी जल स्तर गिरने की समस्या देखी जा चुकी है और अब बेमेतरा जिले में भी यही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। यदि प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का पालन नहीं किया गया और अवैध बोर खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
आज जरूरत इस बात की है कि प्रशासन निगरानी व्यवस्था को मजबूत करे और अवैध बोर खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही किसानों और ग्रामीणों को भी यह समझना होगा कि पानी केवल वर्तमान की जरूरत नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जीवनरेखा भी है। यदि आज भूजल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।